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वफ़ा ना रास आई. तुझे ओ हरजाई
वफ़ा ना रास आई. तुझे ओ हरजाई
मुझे ओ बेवफा ज़रा ये तो बता
तूने आग ये कैसी लगाई
वफ़ा ना रास आई. तुझे ओ हरजाई
वफ़ा ना रास आई. तुझे ओ हरजाई
मुझे ओ बेवफा ज़रा ये तो बता
तूने आग ये कैसी लगाई
वफ़ा ना रास आई. तुझे ओ हरजाई
दौलत के नशे में तूने मुझे
नज़रों से अपनी दूर किया
दौलत के नशे में तूने मुझे
नज़रों से अपनी दूर किया
मेरे प्यार का शीश महल तूने
एक पल में चकनाचूर किया
मुझे दे के यूँ ग़म, ऐसे करके सितम
तूने मेरी वफ़ा ठुकराई
वफ़ा ना रास आई. तुझे ओ हरजाई
वफ़ा ना रास आई. तुझे ओ हरजाई
तूने रूप खिज़ाओं का बख्शा
मेरे गुलशन की हरियाली को
तूने रूप खिज़ाओं का बख्शा
मेरे गुलशन की हरियाली को
आबाद नशेमन था जिस पर
तूने काट दिया उस डाली को
मेरे सीने के सुख, दिए तूने हैं दुःख
सारी रस्मे-कसमें भुलाई
वफ़ा ना रास आई. तुझे ओ हरजाई
वफ़ा ना रास आई. तुझे ओ हरजाई
मोहलत ना मिले शायद मुझको
अब तुझसे बिछड़ के मिलने की
मोहलत ना मिले शायद मुझको
अब तुझसे बिछड़ के मिलने की
अरमान हुये सब ख़ाक मेरे
ख्वाहिश ना रही अब जीने की
यादों की चुभन, साँसों की अगन
मेरे मन है आज समाई
वफ़ा ना रास आई. तुझे ओ हरजाई
वफ़ा ना रास आई. तुझे ओ हरजाई
मुझे ओ बेवफा ज़रा ये तो बता
तूने आग ये कैसी लगाई
वफ़ा ना रास आई. तुझे ओ हरजाई
वफ़ा ना रास आई. तुझे ओ हरजाई
वफ़ा ना रास आई. तुझे ओ हरजाई
वफ़ा ना रास आई. तुझे ओ हरजाई