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सूरज ही छाँव बनके
आया है आज तनके
उसका साया ढाल बनके
साथ ना छोड़े
ऐसी ताक़त जिसके आगे
मौत दम तोड़े
हर इक लम्हा हिफाजत
ज़मीन से है फलक तक
उसकी आँखें बाज़ जैसे
हर तरफ देखी
है अकेला फौज जैसा
वार ना चुके
झंझा जंगल में
कसौटा दंगल में
एक तूफान एक गर्जन
मिले तो धरा हिले
एक ज्वाला एक आंधी
फैले तो जले फाटक किले
दोस्त ऐसा जिंदगी में
हर किसीको मिले
जैसे सांस तन को मिले
वो रसूल जैसे
कभी रण तुमुल जैसे
एक धार और एक ख़ंजर
घात ऐसी करे
एक बरबर एक तत्पर
भय भी दहशत से डरे
दोस्त ऐसा जिंदगी में
हर किसीको मिले
जैसे सांस तन को मिले
सूरज ही छाँव बनके
आया है आज तनके
उसका साया ढाल बनके
साथ ना छोड़े
ऐसी ताक़त जिसके आगे
मौत दम तोड़े