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साँसों की कीमत क्या?
जिस्म से रूह जाने के बाद
इस सफ़र का होना है अंत
चार कंधों पर, कफ़न में होके बंद
ज़िंदगी है एक सवाल
रिहलत में है इसका जवाब
चंद लम्हों के हम हैं मेहमान
किस बात का है तुझे ये गुमान?
दो पल में चले जाएगी तेरी जान
जलता देख इस तन को रोएगा इंसान
बस रहेगी राख
रहेगी बस राख
फिर कोई भी आए ना पास
धन की भूख और नाम की छाया
मिटा देगी सब, ये काल की माया
ज़िंदगी तो है बस एक सपना
जाग कर देखों, तो ये जिस्म भी नहीं अपना
चंद लम्हों के हम हैं मेहमान
किस बात का है तुझे ये गुमान?
दो पल में चले जाएगी तेरी जान
जलता देख इस तन को रोएगा इंसान
बस रहेगी राख
रहेगी बस राख
फिर कोई भी आए ना पास
रहेगी बस राख
फिर कोई भी
आए ना पास