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दिल शाद था के फूल
खिलेंगे बहार में
मारा गया ग़रीब
इसी ऐतबार में
खुशी से अपनी आँखों को
मैं ाश्क़ों से भिगो लेता
मेरे बदले तू हंस लेता
मेरे बदले तू हंस लेता
तेरे बदले मैं रो लेती
मुझे आई काश
तेरा दर्द सारा मिल गया होता
मुझे तेरी मोहब्बत का
सहारा मिल गया होता
अगर तूफान नहीं आता
किनारा मिल गया होता
मुझे तेरी मोहब्बत का
सहारा मिल गया होता
ना था मंज़ूर किस्मत को
ना थी मर्ज़ी बहारों की
नहीं तो इश्स गुलिस्ताँ में
नहीं तो इश्स गुलिस्ताँ में
कमी तही क्या नज़ारों की
मेरी नज़रों को भी
कोई नज़ारा मिल गया होता
अगर तूफान नहीं आता
किनारा मिल गया होता
मुझे तेरी मुहब्बत का
सहारा मिल गया होता
अगर तूफान नहीं आता
किनारा मिल गया होता
मुझे तेरी मोहब्बत का
सहारा मिल गया होता