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कैसे देखु मेरी आँखो के
बहुत पास हो तुम
कैसे देखु मेरी आँखो के
बहुत पास हो तुम
कैसे देखु मेरी आँखो के
बहुत पास हो तुम
तुमको महसूस ही करता हू
के एहसास हो तुम
महके रहते हो मेरे जिस्म मे
देखु कैसे
कोई उम्मीद हो जैसे
कोई विषवास हो तुम
कैसे देखु मेरी आँखो के
बहुत पास हो तुम
तुमको छूने से घनी छाँव का
मस मिलता है
तुमको छूने से घनी छाँव का
मस मिलता है
और होठो से कटे चाँद का रस मिलता है
ढूंढते रहने से मिलता नही कोई तुमसा
तुमसा मिल जाए तो किस्मत से ही बस मिलता है
महके रहते हो मेरे जिस्म मे देखु कैसे
गूँजती रहती हो तुम
सांसो मे खुसबु की तरह
गूँजती रहती हो तुम
सांसो मे खुसबु की तरह
और आँखो से हसीन चेहरा
पढ़ा करते है
हमने तो आँखो से
अब सुन ने की आदत कर ली
और होठों से सांस गिना करते है
महके रहते हो मेरे जिस्म मे
देखु कैसे
कोई उम्मीद हो जैसे
कोई विषवास हो तुम
कैसे देखु मेरी आँखो के
बहुत पास हो तुम
तुमको महसूस ही करता हू
के एहसास हो तुम
कैसे देखु मेरी आँखो के
बहुत पास हो तुम