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सुहानी रात ढल चुकी
ना जाने तुम कब आओगे
सुहानी रात ढल चुकी
ना जाने तुम कब आओगे
जहाँ की रुत बदल चुकी
ना जाने तुम कब आओगे
नज़ारे अपनी मस्तियां
दिखा दिखा के सो गये
सितारे अपनी रौशनी
लुटा लुटा के सो गये
हर एक शम्मा जल चुकी
ना जाने तुम कब आओगे
सुहानी रात ढल चुकी
ना जाने तुम कब आओगे
तड़प रहे हैं हम यहाँ
तड़प रहे हैं हम यहाँ
तुम्हारे इंतज़ार में
तुम्हारे इंतज़ार में
फिज़ा का रंग आ चला है
मौसम ए बहार में
फिज़ा क रंग आ चला है
मौसम ए बहार में
मौसम ए बहार में
हवा भी रुख बदल चुकी
ना जाने तुम कब आओगे
सुहानी रात ढल चुकी
ना जाने तुम कब आओगे