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निसदिन सुमिरन ही करूँ
राम राम श्री राम
तेरे दर को छोड़के किस दर को जाऊँ मैं
तेरे दर को छोड़के किस दर को जाऊँ मैं
देख लिया जग सारा मैने
तेरे जैसा मीत नहीं
दाता तेरे जैसा मीत नहीं
तेरे जैसा प्रबल सहारा
तेरे जैसी प्रीत नहीं
किन शब्दों में आपकी महिमा गाऊं मैं
तेरे दर को छोड़के किस दर जाऊं मैं
तेरे दर को छोड़के किस दर जाऊं मैं
अपने पथ पर आप चलूं मैं
मुझमे इतना ज्ञान नहीं
दाता मुझमे इतना ज्ञान नहीं
हूँ मति मंद नयन का अंधा
भला बुरा पहचान नहीं
हाथ पकड़ कर ले चलो ठोकर खाऊं मैं
हाँ तेरे दर को छोड़ के किस दर जाऊं मैं
तेरे दर को छोड़ के किस दर जाऊं मैं