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उस मंज़र का भी क्या कहना
जहाँ शाम यहाँ और सहर वहाँ
उस मंज़र का भी क्या कहना
जहाँ शाम यहाँ और सहर वहाँ
हम भी तो कभी ये ग़ौर करें
होती है हमारी सहर कहाँ
होती है हमारी सहर कहाँ
कुछ दिल की ज़ुबानी लिखना है
कुछ आँखों बीती कहना है
कुछ दिल की ज़ुबानी लिखना है
कुछ आँखों बीती कहना है
पल-भर जो तसल्ली मिल जाए
वो वक़्त कहाँ, वो पहर कहाँ
पल-भर जो तसल्ली मिल जाए
वो वक़्त कहाँ, वो पहर कहाँ
हम भी तो कभी ये ग़ौर करें
होती है हमारी सहर कहाँ
होती है हमारी सहर कहाँ
तेरे नाम के कुछ अल्फ़ाज़ों को
लहरों ने मिटाया यादों को
तेरे नाम के कुछ अल्फ़ाज़ों को
लहरों ने मिटाया यादों को
हम लौट के आए हैं तन्हा
वो वक़्त कहाँ, वो शहर कहाँ
हम लौट के आए हैं तन्हा
वो वक़्त कहाँ, वो शहर कहाँ
हम भी तो कभी ये ग़ौर करें
होती है हमारी सहर कहाँ
होती है हमारी सहर कहाँ (सहर कहाँ)