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हो, नज़र-ए-करम मुझपे देखो, थोड़ी-सी नज़र भर के
हो, नज़र-ए-करम मुझपे देखो, थोड़ी-सी नज़र भर के
कितनी मासूम बनती हो नज़रों से तुम क़तल करके
कितनी मासूम बनती हो नज़रों से तुम क़तल करके
तेरी आँखों की मंज़िल तक...
तेरी आँखों की मंज़िल तक कितनों ने किए हैं सफ़र चल के
कितनी मासूम बनती हो नज़रों से तुम क़तल करके
मैख़ानों पे मैख़ाना, ये दीवाना घूमा बहुत
पर जो तूने पिलाई, उस नशे का नहीं तोड़
मैं हूँ ख़ानाबदोश, ना ठिकाना, ना ही होश
पिला दे मुझे थोड़ी, फिर दिला दे चाहे मौत
भटकता फिरूँ, मुझे घर की तलाश है
मंज़िल, मुसाफ़िर, क्यूँ तेरी निगाहें?
चेहरे को छूती जो तेरी फ़िज़ा है
निगाह-ए-करम कर, तू मुझको पिला दे
मैं बहकूँगा नहीं
तमन्ना-ए-दीदार तेरा, मैं तेरे सिवा तुझसे पहले कुछ देखूँगा नहीं
मैं बन जाऊँ आँखों का सुरमा
लगा लेना मुझको तुम आँखों में, रह लूँगा वहीं
बस थोड़ी जगह तो तू दे
पिला दे, तू इतना सताती क्यूँ है?
ये आँखें शराबी क्यूँ हैं?
निगाहों से, जानम, पिलाती क्यूँ है?
नज़र से जो पिलाती है, मुझे बर्बाद कर डाला
तेरी आँखों में उतरा दोनों आलम का नशा सारा
जो पी ले, होश वो खो दे, वो दुनिया से भटकता है
ये जिसको ना मिली, वो रोज़ मरने को तरसता है
तुम आँखों में शराबों का समंदर लेके चलती हो
तुम आँखों में शराबों का समंदर लेके चलती हो
किनारों पे है दिल, ये डूबने को बस तड़पता है
किनारों पे है दिल, ये डूबने को बस तड़पता है
कितनी मासूम बनती हो नज़रों से तुम क़तल करके
कितनी मासूम...
हाय, कितनी मासूम...
हाय, कितनी मासूम बनती हो, बनती, बनती हो
कितनी मासूम बनती हो नज़रों से तुम क़तल करके
नि-नि, सा-सा, स-स-स, ग-रे-ग, रे-ग
नि-नि, सा-सा, स-स-स, ग-रे-ग, रे-ग
नि-नि, सा-सा, स-स-स, ग-रे-ग, रे-ग
ग-रे, ग-रे, ग-रे, ग-रे-सा-नि-रे-सा
नि-नि, सा-सा, सा-सा, रे-रे, रे-रे, ग-ग, ग-ग, म-म
प-म, प-ग, म-रे, ग-रे-सा, नि-रे-सा
नि-नि, सा-सा, स-स, स-स, ग-रे-ग, रे-सा
नि, नि-सा-सा, स-स, स-स, ग-रे-ग, रे-सा
नि-नि, सा-सा, सा-स, सा-सा