कैसी ये आग है सीने में जलती हुई
साँसों में घुटन सी है रूह ये तड़पती हुई
हर लम्हा एक सदमा हर पल है इम्तेहान
किस जुर्म की मिली है ये उम्र भर की थकान
क्यूँ ये खामोशियाँ शोर करती हैं मुझमें
क्यूँ ये तन्हाईयाँ ज़हर भरती हैं मुझमें
ये दिल की सज़ा है ये दिल की सज़ा
ना कोई दवा है ना कोई है दुआ
ये दिल की सज़ा है ये दिल की सज़ा
जीने की वजह है ना मरने की रज़ा
अँधेरों में डूबा हूँ खुद से ही बेगाना सा
अपनी ही परछाई से अब हूँ मैं अनजाना सा
नज़रें धुंधली सी हैं रास्ता नहीं दिखता
किस मोड़ पे खड़ा हूँ कोई नहीं मिलता
क्यूँ ये आवाज़ें पीछा करती हैं मेरा
क्यूँ ये परछाईं अँधेरा करती हैं मेरा
ये दिल की सज़ा है ये दिल की सज़ा
ना कोई दवा है ना कोई है दुआ
ये दिल की सज़ा है ये दिल की सज़ा
जीने की वजह है ना मरने की रज़ा
तोड़ दूँ ज़ंजीरें या खुद को करूँ फ़ना
इस दर्द के समंदर का कहाँ है किनारा बता
एक चीख है हलक में जो निकल नहीं पाती
ये कैसी बेबसी है जो मिटाए नहीं मिटती
पत्थर हो गया दिल एहसास मर चुके
जितने थे अपने सपने सब बिखर चुके
अब ना कोई तमन्ना ना कोई है आरज़ू
बस एक अंतहीन सफ़र और मैं हूँ रूबरू
ये दिल की सज़ा है ये दिल की सज़ा
ना कोई दवा है ना कोई है दुआ
ये दिल की सज़ा है ये दिल की सज़ा
जीने की वजह है ना मरने की रज़ा