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चला एक राजा जोगी को मनाने
चला एक राजा जोगी को मनाने
जोगिया मनाने, जोगिया मनाने
जोगिया मनाने, जोगिया मनाने
जोगी के चरणों में शीष नवाने
चला एक राजा जोगी को मनाने
आँसु से पग धोये धोये
हर भांति मनावे राजा
हुए प्रस्सन तथास्तु कहा
फिर यज्ञ कर्म शुभ साजा
(संस्कृत मंत्र)
अग्निदेव फिर प्रकट भये
एक पात्र खीर का लेकर
पूर्ण होगी इच्छा तेरी
कहा दशरथ को देकर
एक खीर का भाग राजा ने
कौशल्या को दीन्हा
दूजा भाग प्रियतमा कैकेयी
निहस कर लीन्हा
फिर दोनों रानियों ने अपना
एक-एक भाग निकाला
रानी सुमित्रा को दोनों ने
एक-एक दिया निवाला