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पिंजरे में बैठे ये देखे जहाँ
आँखें हैं नम की ये दुनिया
सुंदर बहुत अजीब भी
डर लगता है मैं अंदर ही सही
कानों में खनके चिड़िया चूड़ियाँ
हाथों में चमके सूरज और
तारों के नाम कहीं
मिल जाएगी इस पिंजरे की चाबी
पर क्या पर खोल उड़ जाऊँ तो
घर परे घर मिल जाएगा
जीना बाहर ना है आसान हम्म ना है आसान हम्म
बागों में भागे ये देखे जहाँ
आँखें कर बंद सब कर दे अनसुना
अभी मुझ में कहीं जान है क्या बाकी
पैरों पे छाले वो रुक ना सका
भूखा और प्यासा ना जाने कब पहुँचेगा
कभी उसे घर की आस वापिस लाएगी
पर क्या पर खोल उड़ जाऊँ तो
घर परे घर गुम जाएगा
जीना बाहर ना है आसान
हम्म
ना है आसान हम्म
सुन तो मेरी देख ये डगर
भागे तेरे पीछे अगर
करे ना कदर तो हासिल
ख़ास है सफ़र ना मंज़िल