
थोड़ा थक गए हैं हम
इन शोर भरी गलियों से
कहीं पे सुकून छुपा
मस्ती भरी शामों में
चलो न ज़रा वहाँ चलें
जहाँ बातें भी धीमे हों
जहाँ दिल की धड़कन बोले
और लम्हें ये मद्धम हों
चलो कहीं दूर
जहाँ ख़ुद से मुलाक़ात हो
चलो कहीं दूर
जहाँ तेरी मेरी बात हो
ना कोई वजह, ना कोई मजबूर
बस तू और मैं
चलो कहीं दूर
दूर ओ ओ
चलो कहीं दूर
ओ ओ
यह शहर रख ले अपने सपने
हम ले चलें अपनी राहें
थोड़ी ख़ुशबू, थोड़ी हवा
थोड़ी तेरी बातें
वक़्त थमे, पल मुस्काए
खो जाएँ इस एहसास में
हर दिन एक नया सुर हो
और रात हो तेरी बाँहें
चलो कहीं दूर
जहाँ ख़ुद से मुलाक़ात हो
चलो कहीं दूर
जहाँ तेरी मेरी बात हो
ना कोई वजह, ना कोई मजबूर
बस तू और मैं
चलो कहीं दूर
चलो कहीं दूर
चलो कहीं दूर
चलो कहीं दूर