हरे कृष्ण
श्रील प्रभुपाद जी के जन्म शताब्दी समारोह के शुभ अवसर पर
हमें ठाकुर भक्तिविनोद ठाकुर नरहरि दास और
नरोत्तम दास ठाकुर की वैष्णव पदावलियों को भक्तों को भेंट करने में अति प्रसन्नता हो रही है
यह वैष्णव पदावली कोई साधारण भजन नहीं है
जब इन पदावलियों को पवित्र आत्माएं गाती हैं
तो साधारण मनुष्य के हृदय में भगवत भक्ति का संचार होता है
वास्तविकता में सभी जीवों के अंदर भक्ति अंश रूप में तो है ही
परंतु जब इन वैष्णव पदावलियों को भक्त गाता है
तो वह अपने हृदय को शुद्ध करके भगवत प्रेम की अनुभूति को प्राप्त करता है
इन पदावलियों को कई वर्षों से वैष्णव जन गाते आ रहे हैं
और श्रील प्रभुपाद जी ने स्वयं गाकर तथा इन पदावलियों को अपने शिष्यों द्वारा गवाकर इतना प्रचारित किया
कि अब इसके अर्थ को पूरा विश्व जानने लगा है
आज एक ऐसा प्रयास 'भक्त कला क्षेत्र' कर रहा
जिसमें इन्हीं पदावलियों को ध्वनांकित करके श्रील प्रभुपाद जी के शताब्दी समारोह के शुभ अवसर पर हम
उन्हें समर्पित कर रहे हैं
भक्तों से हम आशा करते हैं
कि इन पदावलियों का सरल हिंदी रूपांतरण सुनकर
कंठस्थ करके और अपने जीवन को कृतार्थ करके कृष्ण भक्ति की नई अनुभूति को प्राप्त करें