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मरीज़-ए-मोहब्बत उन्हीं का फसाना
सुनता रहा दम निकलते निकलते
मरीज़-ए-मोहब्बत उन्हीं का फसाना
सुनता रहा दम निकलते निकलते
मगर ज़िकरे शामे आलम जब कह आया
मगर ज़िकरे शामे आलम जब कह आया
चराघे सहर बुझ गया जलते जलते
मरीज़-ए-मोहब्बत
इरादा था तारके मोहब्बत का लेकिन
फारएबे तबस्सुम में फिर आ गये हम
फारएबे तबस्सुम में फिर आ गये हम
फारएबे तबस्सुम में फिर आ गये हम
अभी खा के ठोकर संभालने ना पाए
कह फिर काई तोखर संभालते संभालते
अभी खा के ठोकर संभालने ना पाए
कह फिर काई तोखर संभालते संभालते
मरीज़-ए-मोहब्बत
अरे कोई वादा खिलाफी की हद है
हिस्सब अपने दिल में लगा कर तो देखो
अरे कोई वादा खिलाफी की हद है
हिस्सब अपने दिल में लगा कर तो देखो
कयामत का दिन आ गया रफ़्ता रफ़्ता
मुलाक़ात का दिन बदलते बदलते
कयामत का दिन आ गया रफ़्ता रफ़्ता
मुलाक़ात का दिन बदलते बदलते
मरीज़-ए-मोहब्बत
उन्हें खत में लिखा कह दिल मुज़त्रीब है
जवाब उनका आया मोहब्बत ना करते
उन्हें खत में लिखा कह दिल मुज़त्रीब है
जवाब उनका आया मोहब्बत ना करते
तुम्हें दिल लगाने को किस ने कहा था
बहाल जाएगा दिल बहलते बहलते
तुम्हें दिल लगाने को किस ने कहा था
बहाल जाएगा दिल बहलते बहलते
मरीज़-ए-मोहब्बत
हमें अपने दिल की तो परवाह नहीं है
मगर दर्र रहा हूँ यह कमसिन की ज़िद्द है
हमें अपने दिल की तो परवाह नहीं है
मगर दर्र रहा हूँ यह कमसिन की ज़िद्द है
कहीं पाए नाज़ुक में मोआच आ ना जाए
दिल-ए-सख़्त जान को मसालते मसालते
कहीं पाए नाज़ुक में मोआच आ ना जाए
दिल-ए-सख़्त जान को मसालते मसालते
मरीज़-ए-मोहब्बत
वो मेहमान हमारे हुएभी तो कब तक
हुई शमा गुल और न डूबे सितारे
वो मेहमान हमारे हुएभी तो कब तक
हुई शमा गुल और न डूबे सितारे
कमल किस कदर उनको जल्दी थी घर की
वो घर चल दिए चांदनी ढलते ढलते
कमल किस कदर उनको जल्दी थी घर की
वो घर चल दिए चांदनी ढलते ढलते
मरीज़-ए-मोहब्बत उन्हीं का फसाना
सुनता रहा दम निकलते निकलते
मगर ज़िकरे शामे आलम जब कह आया
चराघे सहर बुझ गया जलते जलते
मरीज़-ए-मोहब्बत उन्हीं का फसाना