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किसे अपना कहें कोई इस काबिल नही मिलता
किसे अपना कहें कोई इस काबिल नही मिलता
यहाँ पत्थर बहोट मिलते है लेकिन दिल नही मिलता
यहाँ पत्थर बहोट मिलते है लेकिन दिल नही मिलता
किसे अपना कहें कोई
मुसाफिर अपनी मंज़िल पर पहोचा कर चैन पाते है
मुसाफिर अपनी मंज़िल पर पहोचा कर चैन पाते है
वो मौज़े सर पटकती है जिन्हे साहिल नही मिलता
यहाँ पत्थर बहोट मिलते है लेकिन दिल नही मिलता
किसे अपना कहें कोई
वो मेरा हाल क्यों पुच्छे
वो मुझ पर मेहेरबान क्यों हो
वो मेरा हाल क्यों पुच्छे
वो मुझ पर मेहेरबान क्यों हो
के जिनको हुस्न मिल जाता हैं उनको दिल नहीं मिलता
यहाँ पत्थर बहोत मिलते है लेकिन दिल नही मिलता
किसे अपना कहें कोई
तेरी महफ़िल में सब से अजनबी और सब से बेगानी
तेरी महफ़िल में सब से अजनबी और सब से बेगानी
हम उनसे क्या मिले जिनसे हमारा दिल नही मिलता
यहाँ पत्थर बहोट मिलते है लेकिन दिल नही मिलता
किसे अपना कहें कोई किसे अपना कहें कोई
किसे अपना कहें कोई