आंख बंद करके लोगों की ना सुनके
आसमान पे यूं उड़ा है एक परिंदा
एक परिंदा
आंख बंद करके लोगों की ना सुनके
आसमान पे यूं उड़ा है एक परिंदा
एक परिंदा
ख्वाबों की परछाई है मन में
हौसले की हिम्मत है दिल में
इसकी चाहत दुनिया ये सारी
कोशिशों की मंजिल है यारी
काफ़िला ये चला यूं अकेला
बाँटती रोशनी एक सवेरा
काफ़िला ये चला यूं अकेला
बाँटती रोशनी एक सवेरा
आंख बंद करके लोगों की ना सुनके
आसमान पे यूं उड़ा है एक परिंदा
एक परिंदा
घायलो की दास्ता है कितने सच के
मर मिटेंगे फिर जगेंगे सोच में किसके
घायलो की दास्ता है कितने सच के
मर मिटेंगे फिर जगेंगे सोच में किसके
इसकी बुनियादों में रब है
उसको पाना ही मंजिल है
काफ़िला ये चला यूं अकेला
बाँटती रोशनी एक सवेरा
आंख बंद करके लोगों की ना सुनके
आसमान पे यूं उड़ा है एक परिंदा
एक परिंदा
आंख बंद करके लोगों की ना सुनके
आसमान पे यूं उड़ा है एक परिंदा
एक परिंदा