लड़ना, भिड़ना
भीड़ के जीतना
ये जुनून कुदरत ने
हमको है दिया
है दिया आआअ…..इंडिया
मिट्टी, मिट्टी
अपने पाओं में
मुट्ठियों में
आसमान की बुलंदियाँ
बुलंदिया आआआ…..इंडिया
जीता था तब भी
जीतेगा अब भी
जीतेगा ललकारा जाए
जब जब भी
हक़ से .. हक़ से
हक़ से .. हक़ से
हक़ से इंडिया (हक़ से इंडिया)
हक़ से इंडिया हक़ से इंडिया
हक़ से हक़ से हक़ से हक़ से
हक़ से हक़ से
हक़ से इंडिया हक़ से इंडिया
हक़ से इंडिया हक़ से इंडिया (हक़ से हक़ से इंडिया इंडिया)
कारनामे करकेजिस जगहा से गुज़र जायें
हम निशान क़दमों के छोड़ दें
हां और दोबारा मैदानों में अगर उतार आयें
तो रेकॉर्ड अपने ही तोड़ दें
घुल के बहता है
ये पसीनों में
बनके जज़्बा धड़कता है सीनों में
धक से .. धक से ..
अर्रे हक़ से .. हक़ से
हक़ से
कड़क कड़क गेंदों पे
तड़क भड़क बल्लों से
सड़क सड़क शहरों की
गलियों से मुहल्लों से
कलेजा कारतूस है
करेंगे हम फायर
तो हक्का बक्का
देखता रहेगा अंपाइयर
दिलों के दरवाज़े
दिन दहाड़े खोलेगा
खटखटा के कुंदीयन
हक़ से इंडिया
हैं भले ही गिनती में
ग्यारह सिर्फ़ कहने को
बाहों में करोड़ों का ज़ोर है
आ याद ये दिलाता है
स्टेडियम के हर कोने कोने से
बारपता जो शोर है
हां जब भी जूतों का
बाँधा फीता है
हर क़दम पे
यक़ीन अपना जीता है
शक से .. शक से
अरे हक़ से .. हक़ से
हक़ से इंडिया
हक़ से इंडिया हक़ से इंडिया
हक़ से इंडिया हक़ से इंडिया (हक़ से हक़ से)
हक़ से .. हक़ से
हक़ से हक़ से हक़ से इंडिया
हक़ से इंडिया हक़ से इंडिया
हक़ से इंडिया हक़ से इंडिया (हक़ से हक़ से इंडिया)