येशु अल्लाह और कृष्णा
आ आ आ
जय हो जय हो
येशु अल्लाह और कृष्णा
कौन भगवान है अपना
येशु अल्लाह और कृष्णा
कौन भगवान है अपना
फूल पे फूल चढ़ा दे
दीये पे दीये जला दे
फूल पे फूल चढ़ा दे
दीये पे दीये जला दे
माला पे माला जपना
माल को अंदर करना
माला पे माला जपना
माल को अंदर करना
येशु अल्लाह और कृष्णा
संत कबीर ने देखा था एक सपना
संत कबीर ने हे
पर महाराज ये संत कबीर कौन था
अरे कबीर कौन था
संत कबीर वो था जिसकी वाणी थी ज्ञान की गागरिया
संत कबीर वो था जिसने अपने दोहों से
मानवता का धर्म समझाया
तो आज उसी कबीर के बारे में
कुछ बोलेंगे, आहा, कुछ गाएंगे, ओहो, और नचाएंगे, वाह वाह
संत कबीर ने देखा था एक सपना
जहां पराया कोई नहीं
जो भी है अपना
ये परसों की बात नहीं
ये कल की breaking news है
कि संत कबीर आएं धरती पे
जी हां
संत कबीर खुद आए धरती पे
और बोले कि पांच सौ साल में
कुछ ज़्यादा नहीं बदला है
जीने के लिए जो ज़रूरी है
वो श्वास नहीं बदला है
पोशाक बदली है
पर इंसान नहीं बदला है
डर वही है
डर का सामान कहीं बदला है
अरे पहले चलती थी तलवार की धार
अब चलती है गोलियों की बौछार
पांच सौ साल में
कुछ खास नहीं बदला है
और संत कबीर ने कहा
दिन में तो सब हैं ज्ञानी
अरे साधो दिन में तो सब हैं ज्ञानी
और रात में चोर की नानी
दिन में तो सब हैं ज्ञानी
रात में चोर की नानी
येशु अल्लाह और कृष्णा
कौन भगवान है अपना
आ आ आ हा हा
कबीर कोई बनता नहीं
कबीर कोई हा हा बनता नहीं
वाह क्या बात है महाराज
पैदा होता है जब बच्चा
पैदा होता है जब बच्चा
तो बातें सारी नहीं जानता
वो नाम नहीं जानता
धरम नहीं जानता
जाति या दुनियादारी नहीं जानता
जैसे फूल का रस चुरा ले
कोई काला भंवर
गीली मिट्टी पे लगा दे
कोई पैर की मोहर
अरे ये दुनिया है
जो बनाती है दीवारें
दिल और दिमाग
पर पैदा तो सभी होते हैं
कबीर बनकर
पर ये दुनिया है
जो करती है दिमाग का
गू गोबर
इसलिए कबीर कोई बनता नहीं
अरे साधो कबीर कोई बनता नहीं
कबीर तो होता है बस
कबीर कोई बनता नहीं
कबीर तो होता है बस
येशु अल्लाह और कृष्णा
कौन भगवान है अपना
येशु अल्लाह और कृष्णा
कौन भगवान है अपना
फूल पे फूल चढ़ा दे
दीये पे दीये जला दे
फूल पे फूल चढ़ा दे
दीये पे दीये जला दे
माला पे माला जपना
माल को अंदर करना
येशु रे अल्लाह रे कृष्णा रे अल्लाह रे
येशु रे अल्लाह रे कृष्णा रे
बोलो येशु अल्लाह और कृष्णा की, जय