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Sez on the beat boy
हर घड़ी सबको ही है मची हडबडी (True)
हर घड़ी हो रही दशा भी बत्तर ही (Ooh)
जो बने अफसरी करे यहाँ तस्करी
लगाले मास्का ना करियो तू मसखरी
नशा भी कब तक ही, तुझे दे पाएगा सुकून
जो भी पढ़ा लिखा तूने, अक्सर ही पाएगा तू झूठ
पले हर कही, हर घड़ी, सनसनी सनसनी
पले हर कही, हर घड़ी, सनसनी सनसनी
सबपे है नज़रें, बचके चलरे, पलटे हैं ख़तरे तल्ते नहीं
उखाड़े गड़े मुर्दे दफ़न अब भी हैं कब्रे कई
बंद कंकाल है कोठरी में कितने
करे रोल कैमरा तो ढोंग भी बिकते
मांगे जो शांति गांधी पे, भड़काते लफ़्दे वही
जनता बाद में आता मनी फ़र्स्ट
अभी तक प्रणाली ये क्षतिग्रस्त
अपनी जेब और दूसरों के कान ही हैं भरते सब
कहानी है बुनते सब, कहाँ नहीं हैं बढ़ते कष्ट
जा तू जाके जुमले जाप, न पड़े फ़र्क किसीको
जब तक न पड़ता फ़र्क हर किसीको, हर कही
लो यही है सनसनी
Checkmate
चले लाठिया, चले पत्थर
चले गोलिया भी यहाँ अक्सर
बिना मकसद बना सर्कस
मीडिया है जोकर सारे
पैसों के लिए जो कर पारे
सबके हैं दाम, price fluctuates
कौन करे राज, होता कौन subjugate
कहे कौन होते किसके बोल, हफ्ता भर खबर निचोड
फिर आइए बढ़े अगले समाचार की और
सनसनी खेज चाहिए है न्यूज़
सनसनी करके दे पैसा वसूल
कंटेंट हो सनसनी खेज, तभी तो आएंगे व्यूज़
सनसनी खेज, ख़ूफ़िया सूत्र
Know what it do, चाहिए नहीं proof
सनसनी फेक सारी
बेईमानी की है लेंदारी
थप्प पड़ा सच की है जेब खाली
देख जाली यहाँ चलते धंधे
क्या समझे भार किसीके कंधे पे
कौन है उठाता जोखिम, इरादा लोकहंड
तू रख सब है यहाँ पे तोचन
सोचके देख और देख के सोच
चाहिए clout सभी, यहाँ सेम approach से
है चल रहे अर्सो से
रहो दूर इन फड़ो से
और रखो दूर इससे बचो से
Please!
कितना है टिकता सच, नाम के झूठ पे बिकता सच
किसका है छिपता झूठ, किसका कितना दिखता सच
वो कहते मैं लिखता झूठ
विश्वास ही नहीं होता उन्हें इतना सच
किताबों से मिटता सच, पढ़ा जो वो कितना सच
ये सब, कहने का गूडा भी रखता मैं
जो बाते कहने से औरों की गांडे हैं फटती
आवाज़ उठाने की कीमत चुकानी है पड़ती
यहाँ घर उजड़ते और दुकाने जलती
होती जान हानी, मानहानी
जाता जल घर-बार, माल पानी
जानता नि जिसे कोई, पड़े फर्क न मारे वो कहीं
न बनेगी सनसनी
Fuck
हर घड़ी सबको ही है मची हडबडी (True)
हर घड़ी हो रही दशा भी बत्तर ही (Ooh)
जो बने अफसरी करे यहाँ तस्करी
लगाले मास्का ना करियो तू मसखरी
नशा भी कब तक ही, तुझे दे पाएगा सुकून
जो भी पढ़ा लिखा तूने, अक्सर ही पाएगा तू झूठ
पले हर कही, हर घड़ी, सनसनी सनसनी
पले हर कही, हर घड़ी, सनसनी सनसनी