रात गुमसुम, मद्धम चाँदनी
तन्हा तुझ बिन मेरी ज़िंदगी
ठहरा समा है, उलझा है मन
थमने लगी है मेरी धड़कन
ओझल आँखें मेरी तरसती हैं
ना हो कभी तू ओझल
साँसें मेरी पुकारती हैं
होना नहीं ओझल
सुन, सुन ले ना बातें दिल की जो कह ना सका मन मेरा
कैसा है ये बाँवरा!
जाने क्यूँ अब तक था खोया सहमा सा बेचैन ये मन मेरा!
कैसा है ये बाँवरा!
कैसी उड़ानें दिल ने लगाई
पंखों की ना है कमी
बादल बरस के ज़मीं पे हैं आए
रह जाएँ हम यहीं ओझल
ओझल आँखें मेरी तरसती हैं
ना हो कभी तू ओझल
साँसें मेरी पुकारती हैं
होना नहीं ओझल