क्यूँ झुकी नज़र? क्या तुझे है फ़िकर?
सुनो दिल की भी ज़रा
क्या हैं सपने वो तेरे? ख़्वाब बिखरे जो तेरे
पूरे कर दूँ मैं सभी
जो है तेरी नज़रों में
देख पाए ना कोई वो
शोर जितने भी करूँ
सुन पाए ना कोई भी तुमको यहाँ
हर पल एक नया क़िस्सा
हर मोड़ पर है नया तेरा ये सफ़र
मौसम भी कहीं बदले हैं साल-भर
वक़्त है तू भी ठहर ज़रा
कभी सुकून, कभी हों ग़म की बारिशें
कभी नाराज़ हो जाए ज़रा सी बात पर
थोड़ा हँसूँ, थोड़ा सा आँसू भी है ज़रा
थोड़ा जीना भी है ज़रूरी, है ना?
हर पल एक नया क़िस्सा
हर मोड़ पर है नया तेरा ये सफ़र
मौसम भी कहीं बदले हैं साल-भर
वक़्त है तू भी ठहर ज़रा
वक़्त है तू भी ठहर ज़रा