कितनो ने साँचे रिश्ते धागे,
रेशम सी डोरी,
खींचे बाँधे..
पर मैं ना सिमटा
तोड़ धागे
छोड़ के पिंजरा
पीछे मैं आगे
अब बस यहा पे मन लगता नहीं
हाँ मेरा दिल तो वहीं है वहीं
हाँ मेरा दिल तो वहीं है वहीं
जिस जगह तू होता है
जहाँ कांधे पे मेरे सिर रख के सोता है
हाँ मेरा दिल तो वहीं है वहीं
हाँ मेरा दिल तो वहीं है वहीं
हाँ मेरा दिल तो वहीं है वहीं
हाँ मेरा दिल तो वहीं है वहीं
मोर के सारे पंख खुले
वैसा ही मैं जागा जागा सा
पेच लड़ाती पतंग कोई,
काट के फिरता में जाता जाता सा..
अब यहाँ मन लगता नहीं है
अब बस यहा मन लगता नहीं
हाँ मेरा दिल तो वहीं है वहीं!
हाँ मेरा दिल तो वहीं है वहीं!
जिस जगह तू होता है
जहाँ कांधे पे मेरे सिर रख के सोता है
हाँ मेरा दिल तो वहीं है वहीं
हाँ मेरा दिल तो वहीं है वहीं
हाँ मेरा दिल तो वहीं है वहीं
हाँ मेरा दिल तो वहीं है वहीं