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सुमन सुधा राजनी चंदा
आज अधिक क्यों भये
सुमन सुधा राजनी चंदा
आज अधिक क्यों भये
सुमन सुधा
प्रेम सिघषण पिया विराजे
पंखा झालु मैं हौले
मोहित मुग्ध उन्ही को ताको
बन मयुर मन्न डोले
सुमन सुधा राजनी चंदा
आज अधिक क्यों भये
सुमन सुधा राजनी चंदा
आज अधिक क्यों भये
सुमन सुधा
प्रतिबिम्ब मेरी आशाओं का
तुम सन्तोष हो मेरा
आलिंगन सुन्दर सपनो का
खुशियों का कोष हो मेरा
सुमन सुधा राजनी चंदा
आज अधिक क्यों भये
सुमन सुधा राजनी चंदा
आज अधिक क्यों भये
सुमन सुधा