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इठलाती हवा नीलम सा गगन
कलियों पे ये बेहोशी की नमी
ऐसे में भी क्यों बेचैन है दिल
जीवन में न जाने क्या है कमी
क्यूँ आग सी लगा के गुमसुम है चांदनी
सोने भी नहीं देता मौसम का ये इशारा
ये रात भीगी भीगी ये मस्त फ़िज़ाए
उठा धीरे धीरे वो चाँद प्यारा प्यारा
जो दिन के उजाले में ना मिला
दिल ढूंढें है उस सपने को
इस रात की जगमग में डूबी
मैं ढूंढ रही हूँ अपने को
ये रात भीगी भीगी ये मस्त फिजाये
उठा धीरे धीरे वो चाँद प्यारा प्यारा
क्यूँ आग सी लगा के गुमसुम है चांदनी
सोने भी नहीं देता मौसम का ये इशारा
मौसम का ये इशारा
इशारा, इशारा, इशारा, ये इशारा
इशारा, इशारा, इशारा, ये इशारा