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खो बैठा है बिरहा का नाता उसको
खो बैठा है
होनी हो के रहती है
फिर भी जो घबराई
होनी हो के रहती है
फिर भी जो घबराई
उसको दुनिया कायर कहती है
उसको दुनिया कायर कहती है
खुद होकर रहती है किसी की मस्त
डर में घबराने से हुई आसान
धरती गरजी गगन समान
चलती है बिद्रोह की आँधी
चलती है बिद्रोह की आँधी