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दुधावर साय धरावी
तसं शास्त्रीय संगीताच्या आधारे
मराठी नाट्यसंगीत दाट होत गेलं
स्वयंवर मानापमान सौभद्र या सारख्या नाटकांमुळे
रागदारी चाली मराठी माणसाच्या माजघरात आल्या
आणि मराठी माणूस अक्षरशः
यमन भीमपलास भूप बिहाग
या सारखे राग ओळखू देखेल लागला
मानापमानातलं धैर्य धारच्या तोंडचं
एक अजरामर पद आता ऐकूयात
आ आ आ
रवि मी आ
रवि मी
रवि मी आ
रवि मी
आ आ
रवि मी आ
रवि मी
आ आ आ आ आ
रवि मी
हा चंद्र कसा मग मिरवितसे लावित पिसे
रवि मी
रवि मी रवि मी
रवि मी रवि मी
रवि मी रवि मी
रवि मी
रवि मी रवि मी
हा चंद्र कसा मग मिरवितसे लावित पिसे
रवि मी
आ आ आ आ आ आ
रवि मी
आ आ आ आ आ आ
रवि मी रवि मी
रवि मी रवि मी
चंद्र कसा मग
रवि मी
रवि मी रवि मी
रवि मी रवि मी
रवि मी रवि मी
रवि मी
हा चंद्र कसा
हा चंद्र कसा मग मिरवितसे लावित पिसे
रवि मी
रवि मी रवि मी
चंद्र कसा
त्या जे न साधे त्या जे न साधे
त्या जे न साधे न साधे त्या जे
आ आ आ आ आ आ