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सफर में रहें
खबर न रही
मैं मुख्लिस तेरा
तू डरना मत, दुनिया जब पूछे मुकरना मत
कर सबसे जुदा
और ले चल कहीं
रातें सुबह बन गईं
आँखों में नींदें भटकती रहीं
तू ले चल कहीं
तू ले चल कहीं
तू ले चल कहीं
मैं भटका मुसाफिर हूँ ले चल कहीं
तू ले चल कहीं
तू ले चल कहीं
तू ले चल कहीं
मैं भटका मुसाफिर हूँ ले चल कहीं
ख़यालात के पहाड़ टूटे जहन पे
सारी ज़िन्दगी हे जी लीये हम इस वहम में
सादगी में तेरी सू हुसन के रूप देखे
एक उम्र गुज़ारी थी जो तेरी दिल लगी में
लफ़्ज़ न कर सके बयां मेरी अफ़्सुर्दगी
शुरू जो तुझ से क्यूं ख़तम वो आक़े मुझपे ही
आएं अबार फिर शराब फिर सुरूर
फिर हुआ ये इंक़िशाफ के ना मिल सकेंगे फिर कभी
उफ़्फ़, क्या करें हम तेरे रूह बारू
क्या करें के हों तेरी नज़र में सुरखरू
होके रहगए हैं तेरे
तेरे बिन मैं नहीं हूँ 'सने ऐंड आयम फ़ेडेड
नई टापी गोली गाने लिखे दिल पे रोग है इतने
क्या ख़ुशी में तेरी शामिल हों जब सोग है इतने
कैसे सिमट जाएं फ़ोरी हम बरसों के बिखरे
फरश भर चुके हैं जान अब हम अर्शों पे लिख रहें
अब हम कलम एसे तोड़ें जैसे दिल के टुकड़े
तुम पे सब करें अयान हम बाक़ी सब से छुप रहें
एक दफ़ा की दिल की बात और फिर हमेशा चुप रहे
तुमने सुन के न सुनी तभी हम कह के मुक्रें
तुम न आए हमें खाएं बस तुम्हारी फ़िकरें
आज जाएंगे बाज़ार फिर ये लफ़्ज़ बिकने
दिल थम गया है ख़्वाहिशें हैं मर चुकी
मैं रह गुज़र था उसका और अब वो गुज़र चुकी
सफर में रहें
खबर न रही
मैं मुख्लिस तेरा
तू डरना मत, दुनिया जब पूछे मुकरना मत
कर सबसे जुदा
और ले चल कहीं
रातें सुबह बन गईं
आँखों में नींदें भटकती रहीं
तू ले चल कहीं
तू ले चल कहीं
तू ले चल कहीं
मैं भटका मुसाफिर हूँ ले चल कहीं
तू ले चल कहीं
तू ले चल कहीं
तू ले चल कहीं
मैं भटका मुसाफिर हूँ ले चल कहीं