तो जनाब आज कौनसी नई कहानी सुनाएँगे
एक कहानी अलिफ़ मियाँ की जो दीवाने लैला के
बैठे साथ तराना जी के थोड़ा दिल को बहलाने
डोरें डाली लाख तराना पर मियाँ को कोई परवाह नहीं
बोली "कहदो आज कहानी पूरी रखो दिल में कोई पर्दा नहीं"
फिर मियाँ बोले के "फ़ोन करा था दिल में थे सवाल बड़े
क्यूँ मुझसे सारा प्यार ले कर मेरे हिस्से में अज़ाब भरे
कुछ ना बोली लैला और बोलती भी तो क्या होता
एक अजनबी सा एहसास लिए अलिफ़ उसके चौखट पे जा पहुँचा
और फिर जंग हुई दो आँखों की आँखों ने सब कुछ जला दिया
एक ज़ख़्मी आशिक़ क्या करता? दुल्हन को घर से भगा लिया
और जब भागा तो समझा अलिफ़ के जीत के भी वो हारा है
लैला ना देखे प्यार से आँखों ने उसकी मारा है
लैला का दामन जो छूटा हाथों ने सुट्टा थाम लिया
सिगरेट के हर कश पे लेकिन लैला का ही नाम लिया
जब दर्द था इतना तो सोचो मोहब्बत आख़िर क्या होगी
लो आ गए ले कर हम फिर से एक कहानी मोहब्बत की
सुनते ही ज़रा ग़ौर फरमाएँ ये पीछे की भी है और आगे की