Elige una pista para reproducir
Sencillo / Pista
जानाँ, तू आता नहीं
सपनों से जाता नहीं
मिल जाए, क्या ही बात थी
कामिल हो जाती वहीं
हाँ, मैं तेरे सवालों का मंज़र हूँ
जो तू माँगे, जवाबों में रहती हूँ
मैं भी सोचूँ वो पल सारे मिल जाएँ
तेरी होके ना तेरी ही रहती हूँ
मैं भी चाहूँ यहीँ पे तो रुक जाना
कितना चाहा था मुझको ये कह जाना
तेरी मुझसे ये दूरी मैं होने नहीं देती
हर लम्हा मैं ख़ुद से ये कहती हूँ
तू आता नहीं
सपनों से जाता नहीं
मिल जाए, क्या ही बात थी
कामिल हो जाती वहीं
जो भी हो राज़ तेरा
मुझको बताता नहीं
मिल जाए, क्या ही बात थी
कामिल हो जाती वहीं
सँभाल के रखा वो फूल मेरा तू
मेरी शायरी में ज़रूर रहा तू
जो आँखों में प्यारी-सी दुनिया बसाई
वो दुनिया भी था तू, वो लम्हा भी था तू
हाँ, लगते हैं मुझको वो क़िस्से सताने
देता ना दिल मेरा तुझको भुलाने
अधूरे से वादे, अधूरी-सी रातें
अब हिस्से में दाख़िल मेरे बस वो यादें
रहना था बन के हमदम तेरा
ऐसे जाना ही था, फिर तू क्यूँ ठहरा?
अब ना माने मेरा दिल क्यूँ ना तेरे क़ाबिल
थी इक आरज़ू कि मैं कहती रही, पर
तू आता नहीं
सपनों से जाता नहीं
मिल जाए, क्या ही बात थी
कामिल हो जाती वहीं
जो भी हो राज़ तेरा
मुझको बताता नहीं
मिल जाए, क्या ही बात थी
कामिल हो जाती वहीं