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क्यों सोया जाए ना
चाहूँ मैं तुझे रातों में
क्यों खोया जाए हाँ
दिल यूँ ही तेरी बातों में
क्यों सोया जाए ना
चाहूँ मैं तुझे रातों में
क्यों खोया जाए हाँ
दिल यूँ ही तेरी बातों में
दिखता है चेहरा तेरा
सूनी-सूनी रातों में
आँख भर आए जब भीगूँ
तुझ बिन इन बरसातों में
दिखता है चेहरा तेरा सूनी-सूनी रातों में
आँख भर आए जब भीगूँ
तुझ बिन इन बरसातों में
नींदें खफ़ा हैं बिना तेरे ओ जाने जाँ
आँखें बैठी रह गईं राह तकें तेरी
आके दे जा तू सुला
क्यों सोया जाए ना
चाहूँ मैं तुझे रातों में
क्यों खोया जाए हाँ
दिल यूँ ही तेरी बातों में
क्यों सोया जाए ना
चाहूँ मैं तुझे रातों में
क्यों खोया जाए हाँ
दिल यूँ ही तेरी बातों में
बातों में, बातों में
दो मुलाकातों में
तू
मुझे अपना समझ बैठी
रातों ही रातों में
मैं दिखूँ ख़्वाबों में, तू उसे
प्यार समझ बैठी
ना नींद, ना होश, ना सुकून
धीरे-धीरे चढ़े जो मेरा सुरूर
नशा नहीं ये, जो है वो फ़ितूर
फिर भी किस बात का तुझे गुरूर
करता नहीं मैं जी-हुज़ूरी
लगता नहीं मुझे ये ज़रूरी
रहने दे बातें ये सारी अधूरी
सोके भी नहीं होंगी तेरी ख़्वाहिशें पूरी
ना दे सकूँ तुझे प्यार जो माँगे मेरा
ना कह सकूँ मैं जाने जाना
खुद को तेरा
तेरा होकर भी
ना तेरा हो पाऊँगा
झूठे दिखावे भी
ना तेरे आगे कर पाऊँगा
झूठी-झूठी बातें
झूठे तेरे वादे ऐसा क्यूँ?
सपने देके तूने उम्मीदें लगाई मुझसे क्यूँ?
सारे झूठे लारे
तेरे ही सहारे
बैठी मैं रहूँ
बैठी मैं रहूँ
बैठी मैं रहूँ
हुआ प्यार भी क्या तुझे
पहली दफ़ा है पिया
हौले से चढ़े जो वो
प्यार नशा है पिया
प्यार तो प्यार है
जितनी दफ़ा हो पिया
फिर तू होना ना मेरा
क्यों सोया जाए ना
चाहूँ मैं तुझे रातों में
क्यों खोया जाए हाँ
दिल यूँ ही तेरी बातों में
क्यों सोया जाए ना
चाहूँ मैं तुझे रातों में
क्यों खोया जाए हाँ
दिल यूँ ही तेरी बातों में
आआआ आआआ