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रास्ता भी हसी, हमसफ़र भी हसी
अब कहीं खो भी जाए, तो कुछ ग़म नहीं
रास्ता भी हसी, हमसफ़र भी हसी
अब कहीं खो भी जाए, तो कुछ ग़म नहीं
रास्ता भी हसी
जाग उठा है, सारे राह सोया नसीब
कोई बैठा है दिल के कुछ इतना करीब
ऐसा लगता है दिल आज तन्हा नहीं
रास्ता भी हसी, हमसफ़र भी हसी
अब कहीं खो भी जाए, तो कुछ ग़म नहीं
रास्ता भी हसी
सोने चांदी की होती है पूजा यहाँ
आज भी दिल का होता है सौदा यहाँ
ये झंडूम है ऐ दोस्त दुनिया नहीं
रास्ता भी हसी, हमसफ़र भी हसी
अब कहीं खो भी जाए, तो कुछ ग़म नहीं
रास्ता भी हसी
कौन सुनता है, किसकी यहाँ दास्ता
कौन समझेगा मजरूह दिल की ज़ुबां
आप मुझको ना समझे तो शिकवा नहीं
रास्ता भी हसी, हमसफ़र भी हसी
अब कहीं खो भी जाए, तो कुछ ग़म नहीं
रास्ता भी हसी, हमसफ़र भी हसी
अब कहीं खो भी जाए, तो कुछ ग़म नहीं
रास्ता भी हसी