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सब कुछ मेरा ले कर
पूछते हो दिया क्या है
सरेआम मेरा कर क़त्ल
कहते हो किया क्या है
आखे अगर करू बंद
अँधेरा न दिखे
सूरज को अगर करू तंग में
रौशनी न दिखे
करदे मुझे जिन्दा दफ़न
ढूंढते हो कहा है
फिर चाँद को देखा कर कहते हो
की सुबह है
दिल में नहीं तो ना सही
इसके सिरहाने दो घड़ी
दो बैठने मुझे तुम अगर
जी लूँ मैं पल में ज़िंदगी
पर ये भी ना मुमकिन
होगा तुमसे, क्यूँ पता है
दिल नाम की वो चीज़
तेरी कब से लापता है
सब कुछ मेरा ले कर
हम्म हम्म हम्म हम्म