बातें होठों तक क्यों ना तुम अब लाती हो
बस बातें ही ख़ुद से तुम कह जाती हो
मैं तो संभला नहीं एक बार के नशे में
तुम कैसे इतने लोगों को आज़माती हो
क्या ख़बर क्या पता मुझे
आँखों में है क्या ये ना जाने
कोई आए मुझे लेकर जाए
यहाँ बंद हो चुके मैख़ाने
तेरे हो गए मेरे
रंग सारे तेरे हो गए
हम तो खो गए जैसे
किनारों पे ही रो गए
कभी आओ बैठो ज़रा
मुझसे मेरा हाल तुम पूछो ना
कैसा रहा मेरा बीता वक़्त
ये बातें तुम मुझसे मत पूछो ना
मुझे लिख लिया करो किताबों में
ताकि तुम मुझे कभी भूलो ना, हाँ हाँ
शामें इतनी हो गई हैं तुम ना गाती हो
आओ बैठो करते बातें जो ज़ाती हो
तुम पहले अपनी ज़ुल्फ़ों में फँसाती हो
फिर चाहे किसी की भी बर्बादी हो
होश ना खोना देखते रहना
आजकल के ख़राब है ज़माना
हम्म, तुम चली हो सपने लेके
गैरों की बाहों में सजाने
चल फिर
तेरे हो गए मेरे
रंग सारे तेरे