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छोरी थी फूलां वरगी
दिल तोड़ के मेरा धर गई
जा जी ले अपनी ज़िंदगी
मेरे नाम की इब तू मर गई
रातां ने करे फ़ोन थी
मिट्ठी सी तेरी tone थी
इकदम तू इतना बदली
सोचूं वा छोरी कौन थी
देखी किसे और के गेल्या
बातां ने फेर गई तू
मेरी नज़रां ते खुद ने
उसे दिन गेर गई तू
नज़रां ते नज़र मिली ना
भीतर में चोर था तेरे
मेरी बस तू ऐ थी रे
तन्ने थे और बथेरे
तन्ने थे और बथेरे
तन्ने तो प्यार ऐ ना था
मेरा भी मोह था घट गया
दिमाग में नफरत भर गई
दिल यूं तेरे पे डट गया
यादां में ज़िंदगी कट जा
जीने की चाह भी घट जा
तेरी गेल्यां मेल मिले ना
कह के कोई पीछे हट जा
तितलियां वरगे यार लिखे
कदे लिख देई मस्तानी रे
मेरी पीड़ा लिखे तो खुदा मानूं
बता लिख देगा के जानी रे
मेरे हाथां में लकीर ना तेरी
दिल में तस्वीर सै तेरी
दारू में घोल के पियूं
देई हर पीड़ रे तेरी
देई हर पीड़ रे तेरी
छाती के ला माँ मेरी
न्यूं बोली थी मेरे ते
भूल जा एड़ी उसनै
खेल गई जो तेरे ते
बाबा भी कह गया चेले
क्यों बनके पागल जी रह्या
वा तेरी थी ऐ कोन्या
जिस खातर दारू पी रह्या
पीना मेरी आदत ना
जज़्बात पिलावे तो पी ल्यूं
तेन्ने मैं रूसवाई में
तेरी याद सतावे तो पी ल्यूं
यो माड़ी है यो आच्छी है
तेरी फिकर पिलावे तो पी ल्यूं
मन्ने बेरा जीते जी मिलनी ना
यो उमर घटावे तो पी ल्यूं
यो उमर घटावे तो पी ल्यूं
बेशक घूंघट के परदे में
मन्ने देखण आईए मरदे ना
मैं अर्थी ते भी उठ जाऊंगा
जे दिल पे हाथ तू धर दे ने
याद थी फूलां बर्गी
भीतर में सारी सड़ गई
मेहंदी ला और किसे की
ज़िंदगी में आगे बढ़ गई
ज़्यादा मैं मांगूं कोन्या
इतना सा काम तू कर दे
बड्डे छोरे का तेरे
नाम मेरे नाम पे धर दे
रह ले जिस गेल्या रहणा
मन्ने तो दर्द यो सहणा
यार जो नया बनाया
बस उसते यो ये कहना
बस उसते यो ये कहना
बस उसते यो ये कहना
बिछने का घणा शौक है उसनै
तू दिल जिसके पैरां में बिछाए फिरे है
रे, मेरा झूठा इश्क है वो
तू जिसने मुंह पे लाए फिरे है
तू जिसने मुंह पे लाए फिरे है