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ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्
अघोरियों संग विरानो में औघड़ रूप बना भयंकर
अघोरियों संग विरानो में औघड़ रूप बना भयंकर
हर हर शंकर जय जय शंकर हर हर शंकर जय जय शंकर
हर हर शंकर जय जय शंकर हर हर शंकर जय जय शंकर
रूप बनाके ये अड़भंगा नाच रहे है मस्त मलंगा
रूप बनाके ये अड़भंगा नाच रहे है मस्त मलंगा
महाकाल मेरे आदिनाथ के माथे चंदा जटा में गंगा
भर भर पी रहे भांग के प्याले मस्त हो रहे है प्रलयंकर
हर हर शंकर जय जय शंकर हर हर शंकर जय जय शंकर
हर हर शंकर जय जय शंकर हर हर शंकर जय जय शंकर
श्मशानों की राख उड़ाके नाचे अघोरी भस्म उड़ाके
श्मशानों की राख उड़ाके नाचे अघोरी भस्म उड़ाके
महादेव को रिझा रहे है बम बम के जयकारे लगा के
डमरू है बजता भोलेनाथ का नाच रहे है धरती अम्बर
हर हर शंकर जय जय शंकर हर हर शंकर जय जय शंकर
हर हर शंकर जय जय शंकर महादेव हर हर शंकर जय जय शंकर शंकरा
गले में है रुण्डो की माला बना के अपना रूप निराला
गले में है रुण्डो की माला बना के अपना रूप निराला
नीलकंठ कहलाने वाले मरघट में है डेरा डाला
मेहरा के हो प्राण से प्यारे रहना सदा ही मेरे बनकर
हर हर शंकर जय जय शंकर हर हर शंकर जय जय शंकर
हर हर शंकर जय जय शंकर हर हर शंकर जय जय शंकर