Elige una pista para reproducir
Sencillo / Pista
नजनाद्री गाथा ये पुरातन
एक शिशु की इच्छा है पावन
केसरी भार्या प्रार्थना विलीं
दिवस रात्री
ईश्वर मनोहर करे प्रदान
अष्टसिद्धि बालक बलवान
अंजन पुत्र पवन नंदन
अरुण किरण प्रातःकाल मुख पर
दिवाकर नहीं समझे फलहार
उत्साही बालक खादिताम इच्छति
नारंग सूर्यं
सूर्य बालक के भीतर और
जगत अंधकारम्
इंद्र देव बालक को रोके
ऐरावत पर चढ़कर टोकें
अनजनेया के समीप जाकर वज्रापात करे देवा
पवन नंदन के हनु को यूं वज्र वार से तोडा
विद्युत वेग से धरनितल तक
रक्त बिंदू का पतन
गहन समुद्र के भीतर जाकर
एक सीप में जा वो समाया
काल-अन्तरे वह बूंद बनी मोती
हनुमरुधिर मणि परिवर्तित
प्रतीक्षा युगानी योग्य योद्धा की
निरंतर निष्काल प्रतीक्षा में
सहस्त्र वर्ष प्रतीक्षा में
निरंतर निष्काल प्रतीक्षा में
सहस्त्र वर्ष प्रतीक्षा में
आ आ आ आ