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वो पास रहें या दूर रहें
नज़रों में समाये रहते हैं
इतना तो बता दे कोई हमें
क्या प्यार इसी को कहते हैं
वो पास रहें या दूर रहें
नज़रों में समाये रहते हैं
इतना तो बता दे कोई हमें
क्या प्यार इसी को कहते हैं
छोटी सी बात मोहब्बत की
छोटी सी बात मोहब्बत की
और वो भी कही नहीं जाती
कुछ वो शरमाये रहते हैं
कुछ हम शरमाये रहते हैं
वो पास रहें या दूर रहें
नज़रों में समाये रहते हैं
इतना तो बता दे कोई हमें
क्या प्यार इसी को कहते हैं
मिलने की घड़ियाँ छोटी हैं
मिलने की घड़ियाँ छोटी हैं
और रात जुदाई की लम्बी
जब सारी दुनिया सोती है
हम तारे गिनते रहते हैं
वो पास रहें या दूर रहें
नज़रों में समाये रहते हैं
इतना तो बता दे कोई हमें
क्या प्यार इसी को कहते हैं