जैसे मैं तुमको सोचूँ
वैसे तुम मुझको सोचो
वो एहसास कैसा होगा?
जितना मैं तुमको सोचूँ
उसका आधा भी तुम मुझको सोचो
मेरा जानना कैसा होगा?
जैसे मैं तुमको चाहूँ हर घड़ी
तुम एक लम्हा मुझे चाहो
वो ख़याल कैसा होगा?
तुम्हें चाहने की ज़रूरत नहीं होगी
तुम्हें सोचे बिना सो भी पाऊँगी
वो दिन, वो सपना कैसा होगा?
जैसे मैं तुमको पाऊँ हर जगह
कोई एक बार तुम मुझे भी पा लो
वो क़रार कैसा होगा?
पास आने की ज़िद सिर्फ़ मैं ना करूँ
तुम भी शायद मन बना लो
वो ज़िद पूरी करना कैसा होगा?
हवाई-जहाज़ पकड़ कर आ भी जाऊँ मैं
मुझे देख कर ख़ुश होगे तुम?
वो मिलना कैसा होगा?
तुम्हें देख कर रो पड़ूँगी मैं
तुम मुझे देख कर मुस्कुराओगे शायद
वो इक़रार कैसा होगा?
कैसा होगा वो मंज़र
जब तुम मुझे मिलोगे
शायद नहीं मिलोगे
शायद कभी कुछ नहीं कहोगे
वो दिल का टूटना कैसा होगा?
वो इंतज़ार कुछ ऐसा होगा