सबसे पहले तो आदाब नमश्कार सभी को
एक situation के ऊपर मैंने चार line लिखी थी
Situation ये थी के जब आप किसी से तालुक खत्म करते है
या कोई आपसे तालुक खत्म करता है
तो तमीज़ में रह कर कभी भी वो तालुक खत्म नहीं हो सकता
अगर आप किसी से कहे या कोई आपसे कहे
के आप मुझसे दूर चले जाइये
तो कोई किसी से दूर नहीं जा पाएगा
आपको बतमीज़ होना हो पड़ेगा
उसी के ऊपर चार line थी की
किसी साधू का दिया हुआ श्राप लिख रही है
वो नाम ऐ महोब्बत को ही पाप लिख रही है
कोई सिखाओ सलीका उसे तालुक खत्म करने का
वो नादान अभी खत में मुझे आप लिख रही है
और भी कुछ फिकरे है जो मैं आपको सुनना चाहूंगा
की खैंच लेती है रूह को अपनी तरफ
जाने कहाँ से उसे ये टोना आ गया
दुनिया ने थपड मारे उफ़ नहीं निकली
उसने हाल पूछा के रोना आ गया
ऐसे खेलता है दिल से जैसे किसी
शैतान बच्चे के हाथ खिलौना आ गया
उसने लगभग दामन बचा ही लिया था
अचानक मेरे हाथ में कोना आया
और हाल ठीक बताना था माँ को पर
पहले जीभ हकलाई फिर रोना आ गया
एक और फ़िक्र है उसे सुनिए गा की
ज़िंदगी मेरी अब ऐसी रवानी में है
के ज़्यादा मुश्किल मुझे आसानी में है
कीमत इश्क़ की बुढ़ापे में समझेगी
के अभी बदन उसका जवानी में है
आप ना हसिये मेरे अंजाम को सुनकर
के किरदार आपका भी कहानी में है