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ये रात कभी
ढलती ही नहीं
तू भी यहां से
चलती ही नहीं
किस मिट्टी की है
बता दे ज़रा
तुझे मेरी कमी
खलती ही नहीं
तू
होती तो
क्या
क्या होता
तुझे मैं इश्क़ से ज्यादा
इश्क़ करता
तू वो ज़हर होती जिसे पीके में
कभी ना मरता
तू मेरे राज़ो की भी
अनसुना राज़ होती
तू
होती तो
इतनी खुशी होती
की मुझसे खुशी दुखी होती
मगर ये हो ना सका
तेरे आंसू में रो ना सका
क्या थी खबर
क्या था पता
खुदी को में दूंगा दगा
तुझसे में वफा करता
तू
होती तो
क्या
क्या होता
तुझे मैं इश्क़ से ज्यादा
इश्क़ करता
तू वो ज़हर होती जिसे
पीके में कभी ना मरता
तू मेरे राज़ो की भी
अनसुना राज़ होती
तू
होती तो
इतनी खुशी होती
की मुझसे खुशी दुखी होती