दोबारा अलविदा, दोबारा रुख़्सतें
दोबारा अलविदा, दोबारा रुख़्सतें
बातों-बातों में हम हैं कर लिए
हाँ, दूरियाँ तो हैं, फिर भी हैं क़ुर्बतें
दोबारा अलविदा, दोबारा रुख़्सतें
क्या ग़लत और क्या सही था
ये बात अब जाने दे
आने वाले कल को ना कर यूँ उदास
आ जाने दे
नज़रें फिरा तू क्यूँ आज ऐसे झुक गई?
मेरी तलाश क्यूँ हर बार तुझपे रुक गई?
सोहबत में तेरी हम ख़ैर-ख़बर लिए
दोबारा अलविदा, दोबारा रुख़्सतें
दोबारा अलविदा, दोबारा रुख़्सतें
रह गया था जो बाक़ी
कह दे कि आज मौक़ा मिला
दिल को बातों से कर ले ख़ाली
मिटा ले शिकवा-गिला
तुझको बता दूँ मैं कि भूल ना जाए कहीं
तेरी ख़ुशी में ही है आज भी मेरी ख़ुशी
ख़ाली जेब में यादें फिर भर लिए
दोबारा अलविदा, दोबारा रुख़्सतें
दोबारा अलविदा, दोबारा रुख़्सतें
ओ, दोबारा अलविदा, दोबारा रुख़्सतें
दोबारा अलविदा, दोबारा रुख़्सतें