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Sencillo / Pista
दो लफ्ज़ की है
बात एक ही है
क्यूँ दरमियाँ फिर रुकी रुकी
कह भी ना पायें
रह भी ना पायें
क्यूँ बेवजह है, ये बेबसी
तुम में हम हैं
हम में तुम हो
तुम से हम हैं
हम से तुम हो
किस्मातों से मिलते हैं दो दिल यहाँ
हर किसी को नही मिलता
यहाँ प्यार ज़िंदगी में
हर किसी को नही मिलता
यहाँ प्यार ज़िंदगी में
खुश-नसीब हैं हम
जिनको है मिली
ये बहार ज़िंदगी में
हर किसी को नही मिलता
यहाँ प्यार ज़िंदगी में
प्यार ना हो तो ज़िंदगी क्या है
यार ना हो तो बंदगी क्या है
प्यार ना हो तो ज़िंदगी क्या है
यार ना हो तो बंदगी क्या है
तुझ से ही हर खुशी है
तेरे दम से आशिकी है, जान ले
मिल जाए हम तो
सब कुछ सही है
फिर इस तरह क्यूँ, हैं अजनबी
तुम में हम हैं
हम में तुम हो
तुम से हम हैं
हम से तुम हो
किस्मातों से मिलते हैं दो दिल यहाँ
हर किसी को नही मिलता
यहाँ प्यार ज़िंदगी में
हर किसी को नही मिलता
यहाँ प्यार ज़िंदगी में
हर किसी को नही मिलता
ज़िंदगी में खुश-नसीब हैं हम
जिनको मिला ज़िन्दगी में
हर किसी को नही मिलता
ज़िंदगी में खुश-नसीब हैं हम
जिनको मिला ज़िन्दगी में
तू महोब्बत है, इश्क़ है मेरा
इक इबादत है, साथ ये तेरा
तू महोब्बत है, इश्क़ है मेरा
इक इबादत है, साथ ये तेरा
जब दिल से दिल मिले हैं
फिर क्यूँ ये फ़ासले हैं, इस तरह
आ बोल दे तू, या बोल दू मैं
कब तक छपाये ये बेखुदी
तुम में हम हैं
हम में तुम हो
तुम से हम हैं
हम से तुम हो
किस्मातों से मिलते हैं दो दिल यहाँ
हर किसी को नही मिलता
यहाँ प्यार ज़िंदगी में
हर किसी को नही मिलता
यहाँ प्यार ज़िंदगी में
खुशनसीब हैं हम जिनको है मिला ये बहार ज़िंदगी में
हर किसी को नही मिलता
यहाँ प्यार ज़िंदगी में
तू है तो मैं हूँ
तू है तो मैं
तू है तो मैं हूँ
तू है तो मैं