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ॐ ॐ ॐ
मैं एक देव हूँ प्रेम में एक देवी के
उसका मुकुट दमके जैसे रवि के तेज से।
उसके होंठ कोमल कमल की पंखुड़ियाँ जैसे
उसकी आँखों में घूमे ब्रह्मांड स्वर्ग से।
उसका रूप जले जैसे पावन अग्नि की लहर
उसके लिए ही धड़कता है मेरा यह अंतर।
उसकी मौजूदगी में मैं खुद को भूल जाऊँ
उसके प्रेम में मैं खुद को पूर्ण चढ़ाऊँ।
उसके गाल चमके जैसे दिव्य प्रभा की बात
काले बाल उसके बहे जैसे रजनी की बात।
उसके झुमके चमकें जैसे नभ में तारे
उसकी चूड़ियाँ गाएँ राग मधुर प्यारे।
उसका रूप जले जैसे पावन अग्नि की लहर
उसके लिए ही धड़कता है मेरा यह अंतर।
उसकी मौजूदगी में मैं खुद को भूल जाऊँ
उसके प्रेम में मैं खुद को पूर्ण चढ़ाऊँ।
उसकी चाल अनुपम उसकी खुशबू सबसे न्यारी
हर फूल की महक भी उस पर हो बलिहारी।
मेरी आत्मा उसके संग सुर में गाती है
सच्चे मन से मैं उसको प्रेम चढ़ाती है।
उसका रूप जले जैसे पावन अग्नि की लहर
उसके लिए ही धड़कता है मेरा यह अंतर।
उसकी मौजूदगी में मैं खुद को भूल जाऊँ
उसके प्रेम में मैं खुद को पूर्ण चढ़ाऊँ।
मैं एक देव हूँ प्रेम में एक देवी के
उसके प्रकाश में रहता हूँ हर क्षण हर एक दे।
उसके प्रेम से जागे आत्मा शाश्वत मेरी
मिलन हमारा - पावन दिव्य और अद्वितीय।