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हम दोनों पढ़ें फ़ैज़ हमें
मिलते इस से फ़ैज़ नहीं
ज़िंदगी शेर जिस में
वज़न क़ाफ़िया है ही नहीं
समंदर के किनारे बैठे
हैं और पाँव गीले
लेके आया पानी, उन्होंने
कहा आप पी लें
आप जनाब बड़े प्यार से बुलाती थी वो
वो चले गई तो लगा
प्यार करने वाला नहीं है
उसके एक सवाल पे मैं लाजवाब
आज जवाब है मेरे पास
सवाल करने वाला नहीं है
याद है, पहले रोज़ कहा था
वफ़ा करेंगे, एक-दूसरे को चाहा था
तुमसे कहा था कि sorry नहीं करना कभी
ये दिल एक ताला, इसमें
चोरी नहीं करना कभी
उसी जुर्म में तू आज भी रातें जगती है
पहले तू भागती थी, reply तू मांगती है
पहले तैमूर famous नहीं था
अभी भी famous नहीं है
पहले तू मेरी थी सिर्फ़
अब तू कहीं की नहीं है
मेहरपोष मैं, तेरी मैं सोच में
एक आवाज़ भी निकलती तू मुँह से
तो मुझसे पूछती थी
तल्लुक़ क्या है मेरा तेरा
मैं बोलता था जो जिस्म का है रूह से
उम्र कट गई है तेरे इंतज़ार में
क़ीमत तो क़ीमत नहीं थी, लगती हज़ार में
सारी बातों का सिर्फ़ एक ही अफ़सोस
दिल से निकल कर तू जा बैठी बाज़ार में
मेरी दास्तां को किया नहीं क़बूल
मेरी वफ़ा सारी उसके लिए फ़िज़ूल
बची कोई आस नहीं, तो अब इतना बता
मैंने चाहा तुझे क्या ये मेरी भूल
मेरे दिमाग़ में वो चल
रहे हैं सवाल तेरे
मेरे ज़ेहन में क्यों आते हैं ख़याल तेरे
मयार तेरे पे मैं उतरा नहीं
तेरे लाख समझाने
पर भी मैं सुधरा नहीं
मेरी ग़लती तो मेरी वजह
तेरी ग़लती तो मैं क्यों वजह
मंज़िल तो पता है पर रास्ता नहीं जाने का
रास्ता ढूँढ भी लूँ
वास्ता नहीं है जाने का
अब किसी से मेरा हिसाब नहीं है
मेरी आँखों में देख
यहाँ कोई ख़्वाब नहीं है
ख़ून के घूँट पी रहा हूँ मैं रात दिन
ये मेरा ख़ून है, ये शराब नहीं है
मैं शराबी हूँ, मेरी आस न छीन प्लीज़
तू मेरी आस है, शराब नहीं है
नोच फेंके लबों पे मैंने सवाल
ताक़त शोख़ी है, जवाब नहीं है
अब तो पंजाब भी पंजाब नहीं है
और ख़ुद जैसा आब, दो आब नहीं है
ज़ख़्म आबाद हैं आने-जाने के
और ऐसा कोई भी हिसाब नहीं है