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जहाँ दया तहाँ धर्म है जहा लोभ तहाँ पाप
जहाँ क्रोध तहाँ पाप है जहा क्षमा तहाँ आप
कबीरा जहा क्षमा तहाँ आप
जहाँ दया तहाँ धर्म है जहा लोभ तहाँ पाप
जहाँ क्रोध तहाँ पाप है जहा क्षमा तहाँ आप
कबीरा जहा क्षमा तहाँ आप
धीरे धीरे रे मना धीरे सब कुछ होत
माली सिचें १०० घना ऋतु आए फल होये
कबीरा ऋतु आए फल होये
धीरे धीरे रे मना धीरे सब कुछ होत
माली सिचें १०० घना ऋतु आए फल होये
कबीरा ऋतु आए फल होये
कबीरा खड़ा बाज़ार में, मांगे सबकी खैर
ना कहू से दोस्ती