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बचपन की रहो मे
उड़ती पतंग के संग
दौड़ती चली जाए हम तुम
कगास की कश्तियाँ जेसे
बारिश की बूँदो मे
भीगते चले जाए हम तुम
पूछते थे कब हम मिले
पढ़ते हाथ की लकीरे सोचते अपनी तक़दीरी
कहते क्या क्यूँ केसे हम तो जानते नही हैं पहचानते नही हैं
अपना दिल
दिल थामलो ज़रा सा
हम तो चली जाइ
एक दूजे की कहानी
कहाँ मिलें थे ना जाने मिलेंगे कब
दिल को संभाल लोना हम तो छे गए
एक दूजे की कहानी
कहाँ मिलें थे ना जाने मिलेंगे कब
बचपन की रहो मे
उड़ती पतंग के संग
दौड़ते चले गए हम तुम
कगास की कश्तियों जेसे
बारिश की बूँदो मे
डूबते चले गए हम तुम
पूछते थे क्यूँ हम मिले
मिट्टी हाथ की लकीरें
बदली अपनी तकदीरे
कहते क्या बात है
हम तो जानते नही हैं
पहचानते नही हैं
अपना दिल