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ये खोया समा हे, क्यूँ बे वजा हे
इन रातों मे हारे, यूँ तू खड़ा हे
साए मे तू अपने, चल तो पड़ा हे
सूनी राहों पर, तू हे रवाँ और मंज़िल कहाँ हे
सहमा ये हर पल तेरा जहाँ हे
राहों की सुबह खोई कहाँ हे
लब पे बस यही तेरी सदा हे
हो जो भी होगा मेरी रज़ा हे
सहमा हुआ था, बीता वो कल हे!
रहना हे तुमको, अब हाल मे हे
थामो अब तुम इस, पल की घडी को
जीना अब तुमको, हर हाल मे हे..