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अखियां आला चश्मा यूं लागे सै पढ़ाकू जू
दिल म तू सेंध मारे Film-आं के डाकू ज्यूँ
अल्फाज़ ना तां घेरे के मैं लिखूं तेरे बारे
मन्ने नुसरत साहिब की कव्वाली लागे रे
हाय चढ़ते December के थर्रते दिनां में
गरम chai की तू प्याली लागे रे
हाय चढ़ते December के
थर्रते दिनां में गरम chai की तू प्याली लागे रे
प्यार हो गया तेरे ते रे पहली मुलाकात में
जाग्या गया, सोया कोन्या फेर सारी रात मैं
दिल आ गया तेरे ते रे तारे सै गवाह
राज़ी-राज़ी कट जावे जिंदगी ये रात में
छोड़ तो ना जागी हाथ पहलां ही बता दे
नीगाह हट्ट ते तेरे तै सब जाली लागे रे
हाए चढ़ते दिसंबर के थर्रते दिना में
गरम चाय की तू प्याली लागे रे
हाए चढ़ते दिसंबर के थर्रते दिना में
गरम चाय की तू प्याली लागे रे
और सोणा हो गया म्हारा गाम तन्ने देखे
पिछे भूल बैठा सारे कम धंधाम तन्ने देखे
पिछे जड्डेयाँ की मिठ्ठी मिठ्ठी धूप तेरे ख्यालां गेल
शायरां में आन लग्या नाम तन्ने देखे पिछे
लक्ष्मी की रागनी तू मिठी सी ग़ज़ल कोई
मूड बीकानेर, रूह मनाली लागे रे
हाए चढ़ते दिसंबर के थर्रते दिना में
गरम चाय की तू प्याली लागे रे
हाए चढ़ते दिसंबर के थर्रते दिना में
गरम चाय की तू प्याली लागे रे
रब बना देवे ज के कोई कवि माने
तो तेरे ऊपर म च्छंद चार लिखू
जे लिख पाऊं तेरी किस्मत तो
उसमें इश्क मोहब्बत और प्यार लिखू
तेरी बाज़ दौड़ बड़ी जिंदगी के म
डेली म इतबार लिखू
फिर मोहित हीर के नाम के आगे
मानस ज़िम्मेदार लिखू, मानस ज़िम्मेदार लिखू