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हाँ ओ सोच के 'गर की होती
तो मोहब्बत न होती
सोच के 'गर की होती तो मोहब्बत न होती
थोड़ी दूरी तूने मुझसे बनाई
बातें पूरी नहीं, आधी ही बताई
तूने ये भी बोला, छोड़ के चला जा
पर बग़ावतें न मेरी बाज़ आईं
तुझे छोड़ने की कोशिश भी
अब करनी छोड़ दी
पूछ के 'गर की होती
क्या इजाज़त दी होती
सोच के 'गर की होती
तो मोहब्बत न होती
साथ हो या न हो तू
तेरी परवाह करूं
मैं आज, कल, परसों
बात कोई न मानूं
ना ही अफ़वाह सुनूं
मैं आज, कल, परसों
बोझ न लगा था तेरा होना
मुझको अभी या कभी
तुझे छोड़ने की कोशिश भी
अब करनी छोड़ दी
बोल के 'गर की होती
तो हिफ़ाज़त न होती
सोच के 'गर की होती
तो मोहब्बत न होती